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बिहार के चारा घोटला से बड़ा छत्तीसगढ़ में गोबर घोटाला, कराई जाए सीबीआई जांच

गौठानों के नाम पर 13 सौ करोड़ के घोटाला का भाजपा नेताओं ने लगाया आरोप

अंबिकापुर। कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार गौठान को मॉडल बनाकर गौ सेवा के नाम पर श्रेय लेने का प्रयास की, जिसमें पूरी तरह से असफल रही। प्रदेश भर में संचालित 9290 गौठान में से चार हजार गौठानों का भाजपा ने जब जावो गौठान, खोलवो पोल अभियान के तहत भ्रमण किया तो 1300 करोड़ रुपये की शासकीय राशि के दुरुपयोग का बड़ा घोटाला सामने आया। गौठान में ना तो गाय है, ना चारा-पानी, ना गोबर। गौ मूत्र की खरीदी सरकार कर रही है, पर गौ मूत्र संग्रह का कोई नमूना इन गौठानों में देखने को नहीं मिला। इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। बिहार में चारा घोटाला से बड़ा छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार द्वारा किया गया गोबर घोटाला है। प्रदेश में कांग्रेस के पाप का घड़ा भर चुका है, जो फूटने वाला है। 2023 में इस सरकार की लुटिया डूबने वाली है। उक्त बातें पूर्व सांसद कमलभान सिंह व पूर्व महापौर प्रबोध मिंज ने संयुक्त रूप से भाजपा कार्यालय संकल्प में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही।
पूर्व सांसद कमलभान सिंह ने गोठानों के नाम पर 1300 करोड़ रुपये के दुरुपयोग और घोटाले का आरोप प्रदेश सरकार पर लगाते हुए कहा गौठानों के नाम पर कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने सब्जबाग दिखाए, लेकिन गौठानों में गायों के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए, न ही गोबर से निर्मित खाद का कहीं अता-पता है। हाल ही में 269 करोड़ रुपये के तो केवल गोबर घोटाले का खुलासा हुआ है। प्रदेश सरकार इस आरोप का जवाब विधानसभा में नहीं दे पाई। इससे साफ है प्रदेश सरकार ने हर क्षेत्र में बेदर्दी से घोटाला करके संसाधनों की लूट मचा रखी है। प्रदेश में चहुंओर गौठानों का बुरा हाल है, गौवंश बेहाल हैं। गंगाजल को हाथ में लेकर कसम खाने वालों ने न गंगा माता को छोड़ा और न गौमाता को। कमलभान सिंह ने भाजपा द्वारा हाल में चलाए गए प्रदेश के 3,948 गौठानों तक पहुंचकर ‘पोल-खोल अभियानÓ की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी गौठानों में कहीं भी गाय नहीं है। कई जगह कांग्रेस की गुंडागर्दी सहते हुए, सत्ता की हिंसा झेलते हुए भी कार्यकर्ताओं ने अपनी जान पर खेलकर प्रदेशभर से आंकड़े जुटाए हैं। कई जगह तो मीडिया के कैमरे के सामने कांग्रेसियों ने मारपीट की। भाजपा कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला किया। फिर भी भाजपा ने अभियान पूरा किया और पाया कि हमने जितना सोचा था, गौठानों की हालात उससे भी अधिक भयावह हैं।
*150 गौवंश भूख, प्यास, घुटन के चलते दम तोड़े*
कमलभान सिंह ने कहा अक्टूबर 2022 में सिर्फ 3 गोठानों में 150 गौवंश भूख, प्यास और घुटन के चलते दम तोड़ दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बघेल के विधानसभा क्षेत्र अचानकपुर गोठान में 25 गायों की हत्या हुई। इसी तरह आदर्श दर्जा प्राप्त गौठान से रातों-रात हिस्ट्रीशीटर गौ तस्करों ने 40 से 50 गायों की चोरी को अंजाम दिया। यह बेहद शर्मनाक है। 40 से ज्यादा गौवंश के गौठान से चोरी होने की पुलिस चौकी में शिकायत की गई है। उन्होंने आगे कहा प्रदेश सरकार गौठानों के नाम पर चाहे जितना ढोल पीट रही हो, सच्चाई यह है कि प्रदेश में 9,290 गौठान का दावा है, परंतु 2023-24 में 175 करोड़ की बजट राशि लेने वाली 80 प्रतिशत गौठानों में गाय रहती ही नहीं। प्रत्येक गौठान में 300 गाय रखने का नियम है। भूपेश ने कहा गर्मी में गाय कहीं और चली जाती हैं, अब तो बरसात है, फिर भी निरीक्षण में गाय नहीं मिली। रोका-छेका का जमीनी सच यह है कि गाय आज भी सड़क पर हैं। ग्राम पंचायतों से जबरन वसूली गई राशि को गौठानों में खर्च नहीं किया गया। कांग्रेस सरकार ने सबसे अधिक पंचायतों के सरपंचों के अधिकार पर डाका डाला है। पंचायतों के विकास के लिए विभिन्न मदों में आई राशि सरपंचों से छीनकर बंदरबांट कर लिया गया। पत्रकार वार्ता दौरान भाजपा के जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर अनिल सिंह, अखिलेश सोनी, मधुसूदन शुक्ला, संतोष दास, रूपेश दुबे उपस्थित थे।
*गौठान में मवेशी नहीं हैं तो चारा किसको खिला रहे-प्रबोध मिंज*
भाजपा नेता व निगम नेता प्रतिपक्ष प्रबोध मिंज ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गांवों के विकास के लिए भेजी गई राशि में भूपेश सरकार ने गौठानों के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया है। प्रदेश सरकार ने दो रुपये किलो की दर से गोबर खरीदकर 10 रुपये प्रति किलो की दर से घटिया वर्मी कंपोस्ट के नाम पर किसानों को बेची। ग्रामीण इलाकों में निर्मित गोठानों में मूलभूत सुविधाएं पानी, शेड, चारा, गोबर खरीद-बिक्री व गोबर से वर्मी खाद बनाने की व्यवस्था की कमी के चलते ग्रामीणों के आय में वृद्धि के लिए गौठान बनाने वाली सरकार के सभी दावे केवल झूठ के पुलिंदे, कागजी हैं। सरगुजा के इलाकों में ग्रामीणों ने बताया गौठान में आज तक एक भी गाय नहीं रही। अफसर और नेताओं के आने पर यहां गाय को एकत्र कर फोटोग्राफी करवाया जाता है, फिर गौठान खाली हो जाता है। उन्होंने स्वयं निरीक्षण उपरांत पाया कि गौठान में गाय नहीं है फिर भी हर माह हजारों रुपयेे का खर्च प्रति गौठान किया जा रहा है और गोबर बेचा जा रहा है। गौठान में मवेशी ही नहीं है तो यह चारा किसको खिला रहे हैं, गोबर की बिक्री कहां हो रही है? सरगुजा जिला में दूरस्थ वन ग्रामों में स्थिति और भी गंभीर है। वहां गोठानों को केवल भूमि घेरने के लिए उपयोग किया जा रहा है। प्रति गोठान लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद ऐसा कोई ढांचा गोठानों में दिखाई नहीं दिया। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने बताया उन्होंने गोबर तो बेचा परंतु एक ढेला आज तक सरकार की तरफ से प्राप्त नहीं हुआ। जब प्रशासन से इसकी जानकारी ली गई तो कोई जवाब नहीं मिला। गौठानों में कार्यरत समिति के कार्यकर्ताओं को गौठान में कार्य करने का मेहनताना पिछले कई महीनों से नहीं दिया गया है। प्रदेश में 1,976 लोग हैं जिन्हें एक लाख से अधिक राशि का भुगतान गोबर के नाम पर किया गया है। उन्होंने कहा बिहार के चारा घोटाले की तर्ज पर इस गौठान घोटाला की जांच सीबीआई से कराई जाए।

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