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मनोभ्रंश का समय पर उपचार नहीं होने पर बन सकती है पागलपन की स्थिति

अमेरिका के ख्यातिप्राप्त न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ली. डेविड केनबर्ग ने मेडिकल कॉलेज में की जानकारी साझा

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के लेक्चर हाल में बुधवार को सतत चिकित्सा शिक्षा अंतर्गत मनोभ्रंश की दशा पर विश्वविख्यात हारवर्ड मेडिकल स्कूल, बास्टन अमेरिका से आए ख्यातिप्राप्त न्यूरोलॉजिस्ट ने मेडिकल छात्रों, इन्टर्नस, चिकित्सकों के बीच जानकारी साझा किया। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन व मनोरोग विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस सीएमई में अमेरिका के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ली. डेविड केनबर्ग ने (मनोभ्रंश) दिमाग की क्षमता कम होने पर प्रकाश डाला, जो दिमाग में एमिलाइड की प्लाटिंग के कारण होता है। इसके कारण ब्लड प्रेशर, ब्रेन स्ट्रोक, हायपोथायराइड प्रमुख हैं। समय पर उपचार नहीं होने से पागलपन की स्थिति बन जाती है। उन्होंने सीएमई में उपस्थित चिकित्सा छात्रों व चिकित्सकों को बताया कि किसी व्यक्ति में दिनचर्या के बीच आंशिक रूप से किसी बात या रखे गए सामान के स्थान को भूल जाना सामान्य बात है, लेकिन भूल-भुलैया में अधिकता बीमारी का रूप ले लेती है। डॉ. ली. डेविड ने आगे कहा कि मनोभ्रंश के उच्चतम स्तर को किसी का नाम भूल जाने, मोबाइल नंबर याद नहीं आने जैसी सामान्य प्रक्रियाओं के बीच समझा जा सकता है। प्रारंभिक चरण में अगर इसका उपचार हो, तो व्यक्ति सामान्य जीवन का हिस्सा बनकर रह सकता है। उन्होंने बताया कभी-कभार हर किसी के बीच ऐसी परिस्थिति बनती है कि एकाग्रता नहीं होने, हड़बड़ी या नींद पूरा नहीं होने की स्थिति में कुछ चीजों को भूल जाता है, यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इन सबके बीच किसी की जीवनचर्या रोजाना प्रभावित हो रही हो तो वह (मनोभ्रंश) दिमाग की क्षमता कम होने का संकेत है।

मनोभ्रंश के चिन्हांकित बीमार 60 लाख-डॉ.मूर्ति

मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के अधिष्ठाता डॉ. रमनेश मूर्ति ने बताया कि इस बीमारी से घिरे लोगों के आंकड़े भारत में चौकाने वाले हैं। मनोभ्रंश की बीमारी के चिन्हांकित लोगों की संख्या 60 लाख है। ये ऐसे आंकड़े हैं, जो चिकित्सकों के समक्ष लाए गए हैं। बीमारी को छिपाने या उसे सामने नहीं लाने की स्थिति में 40 लाख से अधिक केस सामने नहीं आए हैं, नहीं तो यह आंकड़ा एक करोड़ को पार कर सकता है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के ख्यातिलब्ध न्यूरालॉजिस्ट डॉ. ली. डेविड केनबर्ग का कहना है कि छिपाने की प्रवृत्ति के कारण इस बीमारी से घिरे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। मनोभ्रंश का प्रारंभिक लक्षण सामने आने के साथ मनोरोग चिकित्सक के संपर्क में आने पर इसे दवा से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे बीमार के जीवन की गुणवत्ता बनी रह सकती है। इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या व फैकल्टी की उपस्थिति रही।

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